rahul dwivedi54
Saturday, November 26, 2011
ऋते ज्ञानान्न मुक्तिः
विद्या ह वै ब्राह्मणमाजगाम गोपाय मा सेवधिष्टेsहमस्मि असूयकानामृज्वेsहिताय ना मा ब्र्रूया वीर्यवती यथा स्याम
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